पंजीकरण शुल्क वह राशि है जो दस्तावेज़ को उप-निबंधक कार्यालय में पंजीकृत कराने पर देय होती है। स्टाम्प शुल्क दस्तावेज़ के निष्पादन से जुड़ा है, जबकि पंजीकरण शुल्क उसे सरकारी अभिलेख में दर्ज कराने से।
गणना का आधार
पंजीकरण शुल्क भी उसी मालियत पर आधारित होता है जिस पर स्टाम्प शुल्क निकलता है। अर्थात यदि लीज की कुल मालियत बढ़ती है, तो दोनों राशियाँ प्रभावित होती हैं। इसीलिए बजट बनाते समय दोनों का जोड़ देखना चाहिए, अलग-अलग नहीं।
कुल व्यय में और क्या जुड़ता है
- •स्टाम्प शुल्क
- •पंजीकरण शुल्क
- •दस्तावेज़ लेखन / टाइपिंग व्यय
- •साक्ष्य, फोटो एवं अन्य प्रक्रियागत व्यय
अनुमान लगाने का क्रम
1. लीज की शर्तों से कुल मालियत निकालें
2. मालियत पर स्टाम्प शुल्क का अनुमान लगाएँ
3. उसी मालियत पर पंजीकरण शुल्क का अनुमान लगाएँ
4. दोनों जोड़कर कुल देय राशि का अनुमान तैयार करें
यह क्रम सरल है, पर पहला चरण ही सबसे अधिक गलतियों वाला होता है — क्योंकि किराया वृद्धि और अग्रिम राशि अक्सर छूट जाती है।
गणना करते समय यह ध्यान रखें कि अंतिम शुल्क का निर्धारण सम्बंधित उप-निबंधक कार्यालय द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट पर उपलब्ध गणना केवल अनुमानित (indicative) है।