संपत्ति के पंजीकरण में देय राशि केवल विक्रय मूल्य पर निर्भर नहीं होती। मूल्यांकन में सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम दर (सर्किल रेट) और वास्तविक लेनदेन मूल्य — दोनों देखे जाते हैं, और सामान्यतः जो अधिक हो, वही आधार बनता है।
सर्किल रेट को हल्के में न लें
यदि विक्रय मूल्य सर्किल रेट से कम है, तो मूल्यांकन सर्किल रेट पर ही होगा। खरीदार अक्सर सौदे की राशि के आधार पर बजट बनाते हैं और कार्यालय में जाकर अंतर सामने आता है। इसलिए क्षेत्र, भूमि उपयोग और निर्माण की स्थिति के अनुसार लागू दर पहले जाँच लेनी चाहिए।
गणना में कौन-सी बातें प्रभाव डालती हैं
- •संपत्ति का प्रकार — कृषि, आवासीय या व्यावसायिक
- •क्षेत्रफल और निर्मित भाग
- •स्थान (नगरीय / ग्रामीण) तथा लागू दर
- •दस्तावेज़ का प्रकार — विक्रय, दान, लीज, बंधक आदि
पंजीकरण से पहले की जाँच
- •स्वामित्व और पूर्व विलेखों की श्रृंखला
- •किसी प्रकार का बंधक, ऋण या भार
- •नक्शा, क्षेत्रफल तथा सीमाओं का मिलान
- •पक्षकारों के पहचान दस्तावेज़ और साक्षी की व्यवस्था
इन बिंदुओं की जाँच पहले कर लेने से कार्यालय में समय भी बचता है और अनावश्यक पुनरावृत्ति से भी बचाव होता है।
गणना करते समय यह ध्यान रखें कि अंतिम शुल्क का निर्धारण सम्बंधित उप-निबंधक कार्यालय द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट पर उपलब्ध गणना केवल अनुमानित (indicative) है।