स्टाम्प शुल्क दस्तावेज़ पर देय वह शुल्क है जो उसे विधिक रूप से प्रभावी बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसकी गणना दस्तावेज़ की प्रकृति और उसमें दर्ज मूल्य पर आधारित होती है।
पहला चरण: दस्तावेज़ का प्रकार तय करें
विक्रय पत्र, दान पत्र, लीज डीड, किरायानामा, बंधक — इन सबका मूल्यांकन एक जैसा नहीं होता। इसलिए गणना शुरू करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि दस्तावेज़ वास्तव में किस श्रेणी में आता है।
दूसरा चरण: मूल्यांकन आधार निकालें
- •विक्रय में — लेनदेन मूल्य अथवा सर्किल रेट, जो अधिक हो
- •लीज में — अवधि का कुल किराया, वृद्धि, अग्रिम एवं जमा
- •किरायानामे में — अवधि के अनुसार कुल किराया
आम गलतियाँ
- •केवल मासिक किराया देखकर अनुमान लगाना
- •किराया वृद्धि की शर्त को गणना में शामिल न करना
- •पंजीकरण शुल्क को स्टाम्प शुल्क में ही मान लेना
- •सर्किल रेट की जाँच किए बिना बजट बनाना
अनुमान निकालने के बाद उसे कार्यालय की जानकारी से मिलाना सबसे सुरक्षित तरीका है। अनुमान तैयारी के लिए है, अंतिम निर्धारण के लिए नहीं।
गणना करते समय यह ध्यान रखें कि अंतिम शुल्क का निर्धारण सम्बंधित उप-निबंधक कार्यालय द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट पर उपलब्ध गणना केवल अनुमानित (indicative) है।