लीज डीड पर शुल्क को प्रभावित करने वाले कारक सीमित हैं, पर उनका आपसी असर बड़ा होता है। नीचे उन्हीं कारकों को व्यावहारिक क्रम में रखा गया है।
1. लीज अवधि
अवधि जितनी लंबी, कुल मालियत उतनी अधिक। बहुत लंबी अवधि वाले प्रकरणों का मूल्यांकन अलग श्रेणी में होता है, इसलिए ऐसे मामलों में सामान्य अनुमान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
2. किराया और उसकी वृद्धि
स्थिर किराए वाली लीज की गणना सीधी होती है। जहाँ वृद्धि तय है, वहाँ प्रत्येक अवधि का किराया अलग-अलग जोड़ना पड़ता है।
3. अग्रिम राशि और प्रीमियम
एकमुश्त राशि मालियत को तुरंत बढ़ा देती है। यदि अनुबंध में यह राशि दर्ज है तो गणना में इसे छोड़ना उचित नहीं।
4. सुरक्षा जमा
जमा राशि की प्रकृति — वापसी योग्य है या समायोजित होगी — अनुबंध में स्पष्ट लिखी होनी चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव मूल्यांकन पर पड़ सकता है।
5. दस्तावेज़ की भाषा
शर्तों की अस्पष्टता अक्सर पुनर्मूल्यांकन का कारण बनती है। स्पष्ट भाषा में लिखा अनुबंध समय और व्यय दोनों बचाता है।
गणना करते समय यह ध्यान रखें कि अंतिम शुल्क का निर्धारण सम्बंधित उप-निबंधक कार्यालय द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट पर उपलब्ध गणना केवल अनुमानित (indicative) है।