लीव एंड लाइसेंस अनुबंध में परिसर पर अधिकार हस्तांतरित नहीं होता; केवल उपयोग की अनुमति दी जाती है। लीज में स्थिति भिन्न होती है, जहाँ निर्धारित अवधि के लिए कब्जे का अधिकार दिया जाता है। यह अंतर केवल शब्दों का नहीं है — दस्तावेज़ की प्रकृति और मूल्यांकन दोनों इससे प्रभावित होते हैं।
गणना किन आँकड़ों पर टिकी है
- •लाइसेंस अवधि
- •मासिक लाइसेंस शुल्क (रेंट के समकक्ष)
- •अवधि के दौरान तय वृद्धि
- •वापसी योग्य / गैर-वापसी योग्य जमा राशि
व्यावसायिक परिसरों में अक्सर बड़ी जमा राशि रखी जाती है और वृद्धि की शर्त भी होती है। ऐसे अनुबंधों में केवल मासिक राशि देखकर अनुमान लगाना भ्रामक होता है।
उदाहरण
लाइसेंस शुल्क: ₹25,000/माह
अवधि: 3 वर्ष, प्रत्येक वर्ष 5% वृद्धि
पहले वर्ष का कुल = ₹3,00,000; दूसरे वर्ष ₹3,15,000; तीसरे वर्ष ₹3,30,750
कुल आधार राशि ≈ ₹9,45,750 — यही मूल्यांकन का प्रारंभिक बिंदु बनता है
दस्तावेज़ का शीर्षक चाहे कुछ भी हो, मूल्यांकन शर्तों की वास्तविक प्रकृति के आधार पर होता है। इसलिए अनुबंध की भाषा सावधानी से तैयार करानी चाहिए।
गणना करते समय यह ध्यान रखें कि अंतिम शुल्क का निर्धारण सम्बंधित उप-निबंधक कार्यालय द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट पर उपलब्ध गणना केवल अनुमानित (indicative) है।