पंजीकरण की आवश्यकता मुख्यतः अनुबंध की अवधि से जुड़ी होती है। छोटी अवधि के किरायानामे व्यवहार में बिना पंजीकरण के भी प्रयोग होते हैं, जबकि लंबी अवधि के अनुबंधों में पंजीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
शुल्क का आधार
पंजीकरण शुल्क उसी मूल्यांकन पर आधारित होता है जिससे स्टाम्प शुल्क निकलता है — अर्थात अवधि का कुल किराया, वृद्धि और लागू जमा राशि। इसलिए अनुबंध की अवधि बढ़ते ही दोनों राशियाँ बढ़ती हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- •मकान मालिक तथा किरायेदार के पहचान प्रमाण
- •संपत्ति से संबंधित विवरण
- •फोटोग्राफ तथा साक्षी
- •अनुबंध की तैयार प्रति
पंजीकृत अनुबंध के व्यावहारिक लाभ
- •विवाद की स्थिति में मजबूत साक्ष्य
- •शर्तों की स्पष्टता, विशेषकर अवधि और किराया वृद्धि पर
- •पते के प्रमाण तथा अन्य औपचारिक कार्यों में स्वीकार्यता
लंबी अवधि या व्यावसायिक परिसर के मामले में पंजीकरण को अतिरिक्त व्यय के बजाय सुरक्षा के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है।
गणना करते समय यह ध्यान रखें कि अंतिम शुल्क का निर्धारण सम्बंधित उप-निबंधक कार्यालय द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट पर उपलब्ध गणना केवल अनुमानित (indicative) है।